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एक लड़की भीगी भागी सी ...स्वर -अल्पना

गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी

Aug 16, 2017

ढ़लती जाए रात ...फिल्म: रज़िया सुल्तान


फिल्म- रज़िया सुल्तान [१९६१]
मूल गायक : रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: लच्छी राम
गीतकार: आनंद  बख्शी
प्रस्तुत गीत में स्वर - सफ़ीर और अल्पना
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गीत के बोल -

ढ़लती  जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ
ढलती जाए रात …

१.मस्त नज़ारे चाँद सितारे रात के मेहमाँ हैं ये सारे
उठ जाएगी शब की महफ़िल नूर-ए-सहर के सुनके नक्कारे
हो न हो दुबारा मुलाक़ात
ढ़लती  जाए रात …

२.नींद के बस में खोई-खोई कुल दुनिया है सोई-सोई
ऐसे में भी जाग रहा है हम-तुम जैसा कोई-कोई
क्या हसीं है तारों की बारात
ढ़लती जाए रात …

जो भी निग़ाहें चार है करता उसपे ज़माना वार है करता
हूँ राह-ए-वफ़ा का बन के राही फिर भी तुम्हें दिल प्यार है करता
बैठा ना हो ले के कोई घात
ढ़लती जाए रात …
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Aug 10, 2017

साज़-ए-दिल छेड़ दे -फ़िल्म: पासपोर्ट (1961)

फ़िल्म: पासपोर्ट (1961)
 मूल गायक: मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: फारुख कैसर

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प्रस्तुत गीत में स्वर -सफ़ीर  और अल्पना
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Saaze Dil chhed de-
Lyrics :


साज़-ए-दिल छेड़ दे
क्या हसीं रात है
कुछ नहीं चाहिए
तू अगर साथ है
साज़-ए-दिल छेड़ दे …

मुझे चाँद क्यूँ तकता है
मेरा कौन ये लगता है
मुझे शक़ यही होता है
मेरे चाँद से जलता है
हमें इसकी क्या परवाह है
साज़-ए-दिल छेड़ दे  …

तेरे दर पे सर झुक जाए
यहीं ज़िन्दगी रुक जाए
कली दिल की ये खिल जाए
ख़ुशी प्यार की मिल जाए
कभी फिर ग़मी न आए
साज़-ए-दिल छेड़ दे  …
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Aug 9, 2017

अच्छा जी, मैं हारी .... ..काला पानी (1958)

अच्छा जी, मैं हारी .... ..
फिल्म-काला पानी (1958)
संगीतकार -एस.डी.बर्मन
गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी
मूल गायक -मो.रफ़ी, आशा भोसले
प्रस्तुत गीत में स्वर - अल्पना और सफ़ीर
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गीत के बोल
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अच्छा जी मैं हारी, चलो, मान जाओ ना
देखी सबकी यारी, मेरा दिल, जलाओ ना

१.छोटे से क़ुसूर पे, ऐसे हो खफ़ा
रूठे तो हुज़ूर थे, मेरी क्या खता
देखो दिल ना तोड़ो,छोड़ो हाथ छोड़ो
छोड़ दिया तो हाथ मलोगे, समझे..
अजी समझे...
अच्छा जी मैं हारी, चलो...

२.जीवन के ये रास्ते, लम्बे हैं सनम
काटेंगे ये ज़िंदगी, ठोकर खा के हम
ज़ालिम साथ ले ले ,अच्छे हम अकेले
चार कदम भी चल न सकोगे, समझे?हाँ ,समझे...
अच्छा जी मैं हारी, चलो...

३.जाओ रह सकोगे ना, तुम भी चैन से
तुम तो खैर लूटना जीने के मज़े
क्या करना है जी के,हो रहना किसी के
हम ना रहे तो याद करोगे, समझे?समझे!
अच्छा जी मैं हारी, चलो...
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Jul 31, 2017

दिल उसे दो जो जान दे दे...

दिल उसे दो जो जान दे दे
फ़िल्म :अंदाज़
संगीतकार - शंकर जयकिशन
गीतकार-शैलेन्द्र
मूल गायक -मो.रफ़ी और आशा भोसले
प्रस्तुत गीत में आवाजें -सफीर अहमद और अल्पना वर्मा
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दिल उसे दो जो जान दे दे,
जान उसे दो जो दिल दे दे

१) ये प्यार के नज़ारे हैं देख लो जिधर
अब नाचती है दुनिया खुशी का है असर
लो खत्म हुआ है ये आज का सफ़र
अब होगी सुहानी वो कल की सहर, दिल उसे ...

२) जो सोचते रहोगे तो कुछ न मिलेगा
जो चुपके रहोगे तो काम न बनेगा
जो दिल में जलोगे तो अरमान रहेगा
जो बढ़ते चलोगे तो रास्ता मिलेगा, दिल उसे ...

३) वो गुंचा नहीं है जो खिलना न जाने
वो बाद-ए-सबा क्या जो चलना न जाने
वो बिजली नहीं जो चमकना न जाने
वो इन्सान नहीं जो तड़पना न जाने, दिल उसे ...
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Jul 25, 2017

न जाने कहाँ तुम थे -फिल्म- ज़िन्दगी और ख़्वाब



फिल्म- ज़िन्दगी और ख़्वाब [१९६१]
संगीतकार -दत्ताराम
गीतकार- प्रदीप
मूल गायक -सुमन कल्यानपुर और मन्ना डे
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प्रस्तुत गीत में स्वर - अल्पना और सफ़ीर
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Lyrics-
न जाने कहाँ तुम थे, न जाने कहाँ हम थे
जादू ये देखो हम तुम मिले हैं न जाने कहाँ हम थे,
न जाने कहाँ तुम थे अब तो मिलन के सपने खिले हैं...

१. कितने दिनोंपर मिली हैं निगाहें
अब तुम न जाना छुड़ाकर ये बाहें
तुम्हारा ये साथ प्यारा हम क्यों न चाहें ...

२.किसे था पता यूँ हम तुम मिलेंगे
उजड़े हुए दिल फिर से बसेंगे
मोहब्बत के बंधन में हम तुम बधेंगे...

न जाने कहाँ तुम थे ....न जाने  कहाँ हम थे...
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Jul 7, 2017

पर्बतों के पेड़ों पर ...फिल्म-शगुन

पर्बतों के पेड़ों पर ....
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फिल्म-शगुन
संगीतकार-खय्याम
गीतकार-साहिर लुधयानवी
मूल गायक -सुमन कल्यानपुर और मो.रफ़ी
प्रस्तुत गीत में स्वर- सफीर अहमद और अल्पना वर्मा
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परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
सूरमई उजाला है, चम्पई  अंधेरा है
सूरमई उजाला है

१.दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से
दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से
आसमान ने खुश होकर रंग सा बिखेरा है
आसमान ने खुश होकर........

२.ठहरे-ठहरे पानी में गीत सर-सराते हैं
ठहरे-ठहरे पानी में गीत सर-सराते हैं
भीगे-भीगे झोंकों में खुश्बुओं का डेरा है
भीगे-भीगे झोंकों में खुश्बुओं का डेरा है
परबतों के पेड़ों पर................

३.क्यूँ ना जज़्ब हो जाएँ इस हसीन नज़ारे में
क्यूँ ना जज़्ब हो जाएँ इस हसीन नज़ारे में
रोशनी का झुरमट है मस्तियों का घेरा है
रोशनी का झुरमट है मस्तियों का घेरा है
परबतों के पेड़ों पर....................

4.अब किसी नज़ारे की दिल को आरज़ू क्यों हो
अब किसी नज़ारे की दिल को आरज़ू क्यों हो
जब से पा लिया तुम को सब जहाँ मेरा है
जब से पा लिया तुम को सब जहाँ मेरा है
परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
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Jul 2, 2017

संसार से भागे फिरते हो...स्वर : अल्पना


फिल्म-चित्रलेखा
 गीतकार -साहिर
 संगीतकार -रोशन
 मूल गायक : लता मंगेशकर
 प्रस्तुत गीत में स्वर -अल्पना वर्मा
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संसार से भागे फिरते हो, भगवान को तुम क्या पाओगे
इस लोक को भी अपना न सके, उस लोक में भी पछताओगे .

ये पाप है क्या, ये पुण्य है क्या, रीतों पे धरम की मुहरें हैं
हर युग में बदलते धर्मों को कैसे आदर्श बनाओगे

ये भोग भी एक तपस्या है, तुम त्याग के मारे क्या जानो
अपमान रचयिता का होगा, रचना को अगर ठुकराओगे

हम कहते हैं ये जग अपना है, तुम कहते हो झूठा सपना है
हम जन्म बिता कर जायेंगे, तुम जन्म गंवा कर जाओगे


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