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28-चिठ्ठी ना कोई संदेस़

गीतकार :आनंद बक्षी संगीतकार :उत्तम सिंह चित्रपट :दुश्मन - 1998 Original Singer-Lata Presenting cover version -vocals-Alpana प्रस्त...

May 15, 2017

एक लड़की भीगी भागी सी ...स्वर -अल्पना


गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी 
संगीतकार- एस.डी.बर्मन 
मूल गायक-किशोर कुमार 
कवर गायिका-अल्पना वर्मा 
गीत के बोल -
एक लड़की भीगी भागी सी,
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात है
दिल ही दिल में जली जाती है,
बिगड़ी बिगड़ी चली आती है
झुंझलाती हुई,बलखाती हुई,
सावन की सूनी रात में
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात है
एक लड़की भीगी भागी सी
डगमग डगमग लहकी लहकी,
भूली भटकी,बहकी बहकी
मचली मचली,घर से निकली,
पगली सी काली रात में
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात है
एक लड़की भीगी भागी सी
तन भीगा है,सर गीला है,
उसका कोई पेंच भी ढीला है
तनती झुकती,
चलती रुकती,
निकली अंधेरी रात में
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात है
एक लड़की भीगी भागी सी,
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात है
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May 12, 2017

तुम बिन सजन बरसे नयन-फ़िल्म-ग़बन[१९६६]

lyrics -

तुम बिन सजन बरसे नयन, जब-जब बादल बरसे
मजबूर हम, मजबूर तुम, दिल मिलने को तरसे

नागिन-सी ये रात अँधेरी, बैठी है दिल को घेरके
रूठे जो तुम, सब चल दिए मुख फेरके
तुम बिन सजन …

ये दिल तेरे प्यार की ख़ातिर, जग से बेगाना हो गया
एक ख़्वाब था, सब लुट गया, सब खो गया
तुम बिन सजन …

प्यासे-प्यासे नैन हमारे, रो-रोके हारे साजना
आठों पहर बरसे गगन इस अंगना
तुम बिन सजन …
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This song is Sung by Safeer and Alpana
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May 2, 2017

ये पर्बतों के दायरे -फ़िल्म-वासना [१९६८]

फ़िल्म-वासना [१९६८]
गीतकार-साहिर
संगीतकार-चित्रगुप्त
मूल गायक-लता और रफ़ी
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गीत के बोल -:

ये पर्बतों के दायरे ये शाम का धुआँ
ऐसे में क्यों न छेड़ दें दिलों की दास्ताँ

ज़रा सी ज़ुल्फ़ खोल दो फ़िज़ा में इत्र घोल दो
नज़र जो बात कह चुकी वो बात मुँह से बोल दो
कि झूम उठे निगाह में बहार का समाँ
ये पर्बतों के दायरे ...

ये चुप भी एक सवाल है अजीब दिल का हाल है
हर इक ख़याल खो गया बस अब यही ख़याल है
कि फ़ासला न कुछ रहे हमारे दर्मियाँ
ये पर्बतों के दायरे ...

ये रूप रंग ये फबन चमक्ते चाँद सा बदन
बुरा न मानो तुम अगर तो चूम लूँ किरण किरण
कि आज हौसलों में है बला की गर्मियाँ
ये पर्बतों के दायरे ...

Cover by Safeer and Alpana
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Apr 28, 2017

वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मे``री जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

JS-मुहल्ले की सबसे निशानी पुरानी
वो बुढ़िया जिसे बच्चे कहते थे नानी
वो नानी की बातों में परियों का डेरा
वो चेहरे की झुरिर्यों में सदियों का फेरा
भुलाए नहीं भूल सकता है कोई
वो छोटी सी रातें वो लम्बी कहानी
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CS-कड़ी धूप में अपने घर से निकलना
वो चिड़िया वो बुलबुल वो तितली पकड़ना
वो गुड़िया की शादी में लड़ना झगड़ना
वो झूलों से गिरना वो गिर के सम्भलना
वो पीतल के छल्लों के प्यारे से तोहफ़े
वो टूटी हुई चूड़ियों की निशानी
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पा--नी
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कभी रेत के ऊँचे टीलों पे जाना
घरौंदे बनाना बनाके मिटाना
वो मासूम चहत की तस्वीर अपनी
वो ख़्वाबों खिलौनों की जागीर अपनी
न दुनिया का ग़म था न रिश्तों के बंधन
बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िंदगानी
ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी
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सुदर्शन फ़ाक़िर
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Original Singers-Jagjit Singh & Chitra Singh
Presenting Cover version by Dr.Sridhar Saxena & Alpana Verma

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Apr 2, 2017

अपने आप रातों में-फिल्म-शंकर हुसैन [१९७७]

फिल्म-शंकर हुसैन [१९७७]
गीतकार-कैफ भोपाली
संगीतकार-खय्याम
मूल गायिका-लता जी
प्रस्तुत गीत में स्वर-अल्पना वर्मा
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गीत के बोल-

अपने आप रातों में
चिलमनें सरकती हैं
चौंकते हैं दरवाज़े
सिड़ीयां धड़कती हैं
अपने आप
अपने आप

एक अजनबी आहt
आ रही हई कम कम सी
जैसे दिल के पर्दों पर
गिर रही हो शबनम सी
बिन किसी की याद आए
दिल के टार हिलते हैं
बिन किसी के खनकाए
चूड़ियाँ खनकती हैं
अपने आप
अपने आप
2.कोई पहले दिन जैसे
घर किसी के जाता हो
जैसे खुद मुसाफिर को
रास्ता बुलाता हो
पाँव जाने किस जानिब
बे-उठाए उठते हैं
और छम छमा छम छम
पायलें छनकती हैं
अपने आप
अपने आप रातों में
3.जाने कौन बालों में
उँगलियाँ पिरोता है
खेलता हई पानी से
तन बदन भिगोता है
जाने किसके हाथों से
गागरें छलकती हैं
जाने किसकी बातों से
बिजलियाँ लपकती हैं
अपने आप...........
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Singer-Alpana Verma

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Mar 29, 2017

तम्मनाओं के बहलावे में..[Ghazal]

Lyricist--अली सरदार जाफ़री
Music-Jageet Singh
Original Singer-Chitra Singh
Cover sung by Alpana Verma
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Lyrics-
तम्मनाओं के बहलावे में अक्सर आ ही जाते हैं
कभी हम चोट खाते हैं, कभी हम मुस्कुराते हैं

हम अक्सर दोस्तों की बेवफाई सह तो लेते हैं
मगर हम जानते हैं, दिल हमारे टूट जाते हैं

किसी के साथ जब बीते हुए लम्हों की याद आई
थकी आँखों में अश्क़ों के सितारे झिलमिलाते हैं

ये कैसा इश्तियाक़-ए-दीद  है और कैसी मजबूरी
किसी की बज़्म तक जा जा के हम क्यों लौट आते हैं

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Mar 26, 2017

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे-फ़िल्म-गेटवे ऑफ़ इंडिया [1957]

फ़िल्म-गेटवे ऑफ़ इंडिया [1957]
संगीतकार - मदन मोहन
गीतकार -राजेंद्र कृष्ण
मूल गायक - मोहम्मद रफी लता मंगेशकर
This song is sung by Safeer and Alpana
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Lyrics-Do ghadi wo jo

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम ज़माने  से दूर जा बैठे
१.भूल की उनका हम नशी हो के
रोयेंगे दिल को उम्रभर खो के
हाय  क्या चीज़ थी लूटा बैठे

2.दिल को एक दिन जरुर जाना था
वही पहुँचा जहाँ  ठिकाना था
दिल वही दिल जो दिल में जा बैठे

3.एक दिल ही था गमगुसार अपना
मेहरबां, ख़ास राजदार अपना
गैर का क्यों उसे बना बैठे?

4.गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ  ही दे दिया नहीं होगा
देखकर कुछ तो चोट खा बैठे

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम ज़माने  से दूर जा बैठे
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